नई दिल्ली/जम्मू: श्री अमरनाथ जी की पवित्र यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन ने सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर कड़े इंतजाम किए हैं। यदि आप भी इस साल बाबा बर्फानी के दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए RFID (Radio Frequency Identification) कार्ड की अहमियत समझना बेहद जरूरी है। इसके बिना यात्रा मार्ग पर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
क्या है यह RFID कार्ड?
सरल शब्दों में कहें तो यह एक ‘डिजिटल पहचान पत्र’ है। इसमें एक छोटी सी इलेक्ट्रॉनिक चिप लगी होती है जो रेडियो तरंगों के जरिए काम करती है। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह लगे स्कैनर इस कार्ड को दूर से ही पहचान लेते हैं, जिससे अधिकारियों को यात्री की सटीक लोकेशन का पता चलता रहता है।
क्यों है यह अनिवार्य?
अमरनाथ यात्रा का मार्ग दुर्गम पहाड़ियों और अनिश्चित मौसम के बीच से गुजरता है। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है:
सटीक ट्रैकिंग: प्रशासन को पल-पल की खबर रहती है कि कितने यात्री गुफा की ओर बढ़ रहे हैं और कितने वापस लौट चुके हैं।
लापता होने का डर खत्म: यदि कोई यात्री अपने समूह से बिछड़ जाता है या किसी दुर्घटना का शिकार होता है, तो इस कार्ड की मदद से उसे ढूंढना आसान हो जाता है।
भीड़ प्रबंधन: बालटाल और पहलगाम, दोनों रास्तों पर यात्रियों की संख्या को नियंत्रित करने में इससे मदद मिलती है।
कहाँ से मिलेगा यह कार्ड?
श्रद्धालु अपना RFID कार्ड जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास या अन्य निर्धारित पंजीकरण केंद्रों से प्राप्त कर सकते हैं। ध्यान रखें कि इस कार्ड को गले में लटका कर रखना अनिवार्य है ताकि सुरक्षा चौकियों पर इसे आसानी से स्कैन किया जा सके।
सावधानी: यात्रा पूरी होने तक इस कार्ड को संभाल कर रखें और इसे किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा न करें।





