वाराणसी लाइव न्यूज अभी तक। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के लिए आज का दिन बेहद खास और गौरवशाली है। विश्वविद्यालय के दर्शन संकाय के प्रमुख और वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर रजनीश कुमार शुक्ल को भारतीय दर्शन के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए ‘स्वामी प्रणवानन्द दर्शन पुरस्कार–2026’ से सम्मानित करने की घोषणा की गई है।
क्यों मिला यह सम्मान?
अखिल भारतीय दर्शन परिषद के सचिव प्रोफेसर किस्मत कुमार सिंह के अनुसार, चयन समिति ने सर्वसम्मति से प्रो. शुक्ल के नाम पर मुहर लगाई है। उन्हें यह सम्मान दर्शनशास्त्र के क्षेत्र में उनके बेहतरीन शोध, लेखन और दशकों की शैक्षणिक सेवा के लिए दिया जा रहा है।
कब होगा सम्मान समारोह?
यह प्रतिष्ठित पुरस्कार आगामी 23 से 25 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ के जयप्रकाश विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाले परिषद के 70वें अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में प्रदान किया जाएगा।
कुलपति ने जताई खुशी
इस बड़ी उपलब्धि पर संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बिहारीलाल शर्मा ने प्रो. शुक्ल को बधाई देते हुए कहा:
“यह सम्मान न केवल प्रो. शुक्ल का है, बल्कि पूरे विश्वविद्यालय परिवार का गौरव है। भारतीय दर्शन पूरी दुनिया को सही रास्ता दिखाने की ताकत रखता है और ऐसे विद्वानों की वजह से हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा आज भी जीवित और सम्मानित है।”
प्रो. शुक्ल का परिचय
प्रोफेसर रजनीश कुमार शुक्ल भारतीय दर्शन और तुलनात्मक धर्म के जाने-माने नाम हैं। उनके शोध और पुस्तकों ने भारतीय बौद्धिक परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाई है। हाल ही में नई दिल्ली में उनकी पाँच नई पुस्तकों का विमोचन भी हुआ है, जो उनके निरंतर लेखन कार्य का प्रमाण है।
इस घोषणा के बाद से ही काशी के विद्वानों, शिक्षकों और छात्रों में खुशी की लहर है। सभी ने प्रो. शुक्ल को उनकी इस शानदार उपलब्धि पर बधाई दी है।





