वाराणसी लाइव न्यूज अभी तक। धर्म की नगरी काशी में इन दिनों एक नया विवाद गरमा गया है। दुष्कर्म के मामले में सजा काट रहे आसाराम बापू, जो फिलहाल मेडिकल पैरोल पर बाहर हैं, दो दिन पूर्व बाबा विश्वनाथ के दरबार पहुंचे। लेकिन उनके इस दौरे ने श्रद्धा से ज्यादा विवादों को जन्म दे दिया है।
बिना प्रोटोकॉल के ‘खास’ इंतजाम?
जब आसाराम का काफिला मंदिर के गेट नंबर चार पर पहुँचा, तो वहां उनके समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। आरोप है कि एक सजायाफ्ता अपराधी होने के बावजूद उन्हें मंदिर में वैसी ही सुगमता मिली, जैसी किसी खास मेहमान (VIP) को मिलती है। इस दृश्य को देख वहां मौजूद आम श्रद्धालु भड़क गए। लोगों का सवाल है कि क्या कानून सबके लिए बराबर नहीं है?
पुलिस और प्रशासन का पक्ष
विवाद बढ़ता देख पुलिस ने स्पष्ट किया कि आसाराम के लिए कोई आधिकारिक ‘वीआईपी प्रोटोकॉल’ जारी नहीं किया गया था। वह अपने निजी सहयोगियों के साथ आए थे। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा के लिहाज से पुलिस वहां तैनात थी और उनकी भी वैसी ही जांच हुई जैसे अन्य लोगों की होती है। हालांकि, काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने इस मामले पर अब तक चुप्पी साध रखी है, जिससे संदेह और बढ़ गया है।
13 मार्च से काशी में जमावड़ा
आसाराम 13 मार्च से वाराणसी में हैं और बड़ागांव के अनौरा आश्रम में रुके हुए हैं। उनके साथ महंगी गाड़ियों का लंबा काफिला चल रहा है। आश्रम में उनके प्रवचन के दौरान मोबाइल फोन ले जाने पर सख्त पाबंदी है, जिसे लेकर भी कई तरह की चर्चाएं हैं।
सोशल मीडिया पर अब लोग सीधे शासन से पूछ रहे हैं कि एक गंभीर अपराध के दोषी को इतनी सहूलियत और सुरक्षा घेरा आखिर किसके इशारे पर दिया गया?





