लखनऊ, लाइव न्यूज अभी तक। उत्तर प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की तस्वीर बदलने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने स्कूलों के मरम्मत और रखरखाव के लिए चल रहे ‘प्रोजेक्ट अलंकार’ की प्रक्रिया को पहले से कहीं ज्यादा आसान बना दिया है। अब स्कूलों को बजट के लिए नंबरों (वेटेज) की दौड़ में नहीं पड़ना होगा, बल्कि उनकी वास्तविक जरूरत के आधार पर पैसा मिलेगा।
क्या था पुराना पेंच?
इससे पहले लागू व्यवस्था काफी जटिल थी। स्कूलों को 35 तय मानकों के आधार पर अंक दिए जाते थे, जिसके कारण प्रस्ताव भेजने में देरी होती थी और बजट समय पर नहीं मिल पाता था। इसी उलझन को खत्म करने के लिए सरकार ने 2021 और 2023 के पुराने आदेशों को रद्द कर दिया है।
अब कैसे होगा काम?
नई व्यवस्था के तहत अब मरम्मत की जिम्मेदारी और प्रक्रिया को सीधा कर दिया गया है:
प्रधानाचार्य की भूमिका: स्कूल में क्या टूट-फूट है और क्या मरम्मत होनी है, इसका फैसला सबसे पहले वहां के प्रधानाचार्य करेंगे। वे अपनी जरूरतों की लिस्ट बनाकर जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) को भेजेंगे।
इस्टीमेट और मंजूरी: DIOS इस प्रस्ताव पर निर्माण एजेंसी से खर्च का अनुमान (इस्टीमेट) तैयार कराएंगे।
जिला समिति का फैसला: अंत में, जिलाधिकारी (DM) की अध्यक्षता वाली एक चार सदस्यीय कमेटी इन प्रस्तावों को मंजूरी देगी। इस कमेटी में CDO, पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर और DIOS शामिल होंगे।
जरूरत के हिसाब से होंगे काम
अब स्कूल केवल पुराने 35 मानकों तक सीमित नहीं रहेंगे। अगर स्कूल की इमारत में किसी अन्य तरह की मरम्मत की जरूरत है, तो उसे भी प्रस्ताव में शामिल किया जा सकेगा। फिलहाल प्रदेश के 1167 राजकीय स्कूल इस योजना का लाभ उठा रहे हैं।
इस बदलाव से न केवल कागजी कार्यवाही कम होगी, बल्कि स्कूलों की जर्जर इमारतों को समय पर नया जीवन मिल सकेगा।





