वाराणसी की गंगा नदी में नाव पर रोजा इफ्तार करने का मामला अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है। इस मामले में 14 मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है।
क्या है पूरा मामला?
बीते सोमवार को वाराणसी में कुछ मुस्लिम युवकों ने गंगा नदी के बीच नाव पर इफ्तार पार्टी का आयोजन किया था। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। पुलिस का तर्क है कि धार्मिक गतिविधियों के लिए सार्वजनिक स्थान और नदी के नियमों का उल्लंघन किया गया है। इसी आधार पर एफआईआर (FIR) दर्ज कर 14 युवकों को गिरफ्तार कर लिया गया।
अखिलेश यादव का बड़ा बयान
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए इसे गैर-जरूरी बताया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “क्या गंगा में रोजा इफ्तार नहीं कर सकते? डीएम, एसपी और थानेदार को तो खुद इफ्तारी देनी चाहिए थी।”
अखिलेश यादव ने पुलिस की कार्यशैली पर कटाक्ष करते हुए एक मुहावरे का इस्तेमाल किया और कहा, “हथेली गरम तो पुलिस नरम। उन लोगों ने हथेली गरम नहीं की होगी, इसीलिए कार्रवाई हुई।” उनके इस बयान का सीधा इशारा भ्रष्टाचार और पुलिस की मनमानी की तरफ था।
जनता और प्रशासन के बीच बहस
वाराणसी पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई सुरक्षा और नियमों को ध्यान में रखकर की गई है। वहीं, विपक्ष इसे खास समुदाय को निशाना बनाने की राजनीति बता रहा है।
मुख्य बिंदु:
नाव पर इफ्तार का वीडियो वायरल होने के बाद हुई कार्रवाई।
कुल 14 लोगों की गिरफ्तारी और पुलिस केस दर्ज।
अखिलेश यादव ने भ्रष्टाचार और भेदभाव का लगाया आरोप।







