नई दिल्ली: पिछले कुछ दिनों से देश के कई हिस्सों में गैस सिलेंडर की किल्लत की खबरें आ रही हैं, लेकिन सच्चाई कुछ और ही निकली। जिसे लोग ‘गैस की कमी’ समझ रहे थे, वह दरअसल गैस एजेंसी मालिकों द्वारा किए जा रहे एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश है। सरकार के एक छोटे से नियम ने वर्षों से चल रहे इस काले खेल की पोल खोल दी है।
कैसे पकड़ी गई चोरी?
हाल ही में सरकार ने गैस रिफिल बुकिंग के लिए 25 दिनों की समय सीमा निर्धारित की है। इसका मकसद आपूर्ति को सुव्यवस्थित करना था। लेकिन जैसे ही यह नियम लागू हुआ, देशभर में अफरातफरी मच गई। जब आम उपभोक्ता अपना सिलेंडर बुक करने पहुंचे, तो सिस्टम ने “Already Booked” दिखाकर उनकी रिक्वेस्ट रिजेक्ट कर दी।
गैस एजेंसियों का ‘ब्लैक’ सिंडिकेट
जांच में पता चला है कि कई गैस एजेंसी मालिकों ने एक सिंडिकेट बना रखा था। ये लोग आम जनता के नाम पर, उनकी जानकारी के बिना ही चुपके से सिलेंडर बुक कर लेते थे। इन सिलेंडरों को बाद में होटलों, रेस्टोरेंट्स और फैक्ट्रियों में ऊंचे दामों पर ‘ब्लैक’ में बेच दिया जाता था। चूंकि पहले बुकिंग की कोई समय सीमा नहीं थी, इसलिए आम ग्राहक को कभी पता ही नहीं चला कि उसके हिस्से की गैस कहीं और बेची जा रही है।
पैनिक नहीं, सतर्क बनने की जरूरत
भारत में गैस की कोई कमी नहीं है। यह संकट पूरी तरह से बिचौलियों की देन है। जब उपभोक्ता अपनी बुकिंग रिजेक्ट होने पर एजेंसी पहुंचे, तो मालिक जवाब देने के बजाय बचते नजर आए।
अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है, तो इन नंबरों पर तुरंत शिकायत करें:
LPG हेल्पलाइन: 1906
भारत गैस: 1800-22-4344
इंडेन/HP गैस: 1800-233-3555
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन: 1915
चुप न बैठें, जागरूक बनें और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज उठाएं।





