उत्तर प्रदेश दरोगा भर्ती परीक्षा में एक सवाल के विकल्प को लेकर उपजा विवाद अब शांत होता दिख रहा है। परीक्षा में ‘अवसरवादी’ शब्द के पर्यायवाची के रूप में ‘पंडित’ विकल्प दिए जाने पर काफी सियासत हुई, लेकिन अब खबर आ रही है कि भर्ती बोर्ड इस मामले में किसी बड़े एक्शन के मूड में नहीं है।
क्या परीक्षा दोबारा होगी?
भर्ती बोर्ड और पूर्व अधिकारियों के अनुसार, इस गलती के कारण परीक्षा रद्द होने या दोबारा कराए जाने की कोई संभावना नहीं है। अफसरों का कहना है कि यह एक तकनीकी त्रुटि हो सकती है, जिसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। उम्मीद जताई जा रही है कि रिजल्ट अपने तय समय पर ही घोषित कर दिया जाएगा।
क्यों गरमाया है मामला?
वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि यह विवाद इसलिए बढ़ा क्योंकि हाल के दिनों में ब्राह्मण समाज अपनी अस्मिता को लेकर काफी संवेदनशील रहा है। ऐसे माहौल में इस तरह का सवाल आने से विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के नेताओं ने भी विरोध दर्ज कराया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच के निर्देश दिए थे।
पेपर सेट करने के कड़े नियम
पूर्व DGP सुलखान सिंह के मुताबिक, पेपर लीक रोकने के लिए नियम इतने सख्त होते हैं कि भर्ती बोर्ड के अधिकारी भी पेपर को पहले से नहीं पढ़ सकते। पेपर सीधे एजेंसी द्वारा सीलबंद तैयार किए जाते हैं। ऐसे में किसी खास मंशा से ऐसा विकल्प डालना मुश्किल लगता है। फिलहाल, न तो परीक्षा कराने वाली कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी है और न ही किसी अधिकारी पर गाज गिरने के संकेत हैं।






