देश की 259 जगहों पर आज बजेगा युद्ध का सायरन, सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल में आपको करने होंगे ये 5 काम।


केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिक सुरक्षा (सिविल डिफेंस) के लिए देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 7 मई को मॉक ड्रिल आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। ताकि किसी आपात स्थिति में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। देश में करीब 300 स्थानों पर इसका आयोजन किया जाएगा। आईए जानते हैं, मॉक ड्रिल के बारे में वह सब कुछ, जिसे आप जानना चाहते हैं।

पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच उपजे तनाव के बीच देश में बुधवार को 300 से अधिक जिलों में सरकार सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल आयोजित करने जा रही है। परमाणु संयंत्रों, सैन्य ठिकानों, रिफाइनरी और जलविद्युत बांधों जैसे संवेदनशील प्रतिष्ठानों वाले करीब 300 नागरिक सुरक्षा जिलों में हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन, ‘शत्रुतापूर्ण हमले’ के लिए सिविल डिफेंस और बंकरों और खंदकों की सफाई के साथ मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाएगा।इस अभ्यास के तहत ब्लैकआउट (बिजली कटौती), एयर रेड सायरन (हवाई हमले की चेतावनी) और निकासी प्रक्रियाओं जैसी स्थितियों का अभ्यास किया जाएगा। सिविल डिफेंस जिले अग्रिम पंक्ति के क्षेत्र होते हैं, जिनका कार्य एयर रेड ड्रिल, ब्लैकआउट अभ्यास, निकासी प्रोटोकॉल और नागरिक जागरूकता सत्र जैसी नागरिक सुरक्षा गतिविधियों को संगठित करना, निष्पादित करना और बेहतर बनाना होता है।

अधिकारियों के अनुसार, यह अभ्यास किसी आसन्न युद्ध का संकेत नहीं है, बल्कि यह सिविल डिफेंस नियमावली, 1968 के तहत लंबे समय से चले आ रहे ढांचे का हिस्सा है। यह नियम शीत युद्ध के दौर के हैं, लेकिन अब इन्हें आधुनिक खतरों के अनुसार नया रूप दिया जा रहा है। यह ड्रिल भारत की युद्ध जैसी आपात स्थितियों में तेज और समन्वित प्रतिक्रिया की क्षमता को परखने के लिए आयोजित की जा रही है।



सिविल डिफेंस जिले क्या हैं?
सिविल डिफेंस जिले ऐसे निर्दिष्ट क्षेत्र हैं जहां भारत सरकार सक्रिय रूप से सिविल डिफेंस कार्यक्रमों को लागू करती है। ये जिले युद्ध, हवाई हमले, मिसाइल हमले या बड़े पैमाने पर आतंकवादी हमलों जैसी आपात स्थितियों के मामले में तैयारी गतिविधियों के लिए प्रशासनिक और परिचालन केंद्र के रूप में काम करते हैं। उनकी भूमिका संसाधनों को व्यवस्थित करना, नागरिकों और स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करना और कई सरकारी और नागरिक एजेंसियों से जुड़ी प्रतिक्रियाओं का समन्वय करना है।

सिविल डिफेंस जिले ये कार्य करते हैं:
स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करना और उन्हें संगठित करना।
ब्लैकआउट और निकासी अभ्यास आयोजित करना।
होम गार्ड, एनसीसी, एनएसएस, पुलिस और स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय का प्रबंधन करना।
सार्वजनिक जागरूकता अभियान चलाना और आश्रय योजना पर काम करना।

सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल क्या है?
सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल एक ऐसा अभ्यास होता है जिसमें वास्तविक परिस्थितियों की तरह ही हवाई हमले के सायरन बजाए जाते हैं, शहरों को ब्लैकआउट (बिजली गुल) किया जाता है, नागरिकों को सुरक्षित आश्रयों में ले जाया जाता है और इमरजेंसी टीमें अपनी भूमिका निभाती हैं। इसका मकसद नागरिकों में जागरूकता बढ़ाना और आपदा के समय घबराहट, भ्रम और नुकसान को कम करना होता है।

मिजोरम और नागालैंड में इस समय होगी मॉक ड्रिल

मिजोरम में शाम 4 बजे व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाएगा, जिसमें नागरिकों को आपातकालीन परिस्थितियों में सुरक्षा उपायों की जानकारी दी जाएगी. वहीं नागालैंड में 10 सिविल जिलों में शाम 4 बजे से मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी, जिसमें स्थानीय प्रशासन और नागरिकों की भागीदारी होगी. बिहार के विभिन्न जिलों में शाम 7:00 बजे से 7:10 बजे तक ब्लैकआउट किया जाएगा. इस दौरान सभी लाइटें बंद की जाएंगी और वॉर लाइट सिचुएशन से बचने की तैयारी की जाएगी.

पटना में शाम 6:58 बजे सायरन बजाया जाएगा, जिसके 2 मिनट बाद सभी लोग बत्ती बंद कर देंगे. शहर में 80 स्थानों पर सायरन बजाए जाएंगे. लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के 19 जोखिम वाले स्थानों को मॉक ड्रिल के लिए चिह्नित किया गया है.

श्रेणी-I : उच्च प्राथमिकता वाले स्थान

इन स्थानों को राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक महत्त्व, औद्योगिक केंद्रों, सैन्य ठिकानों और आर्थिक गतिविधियों के कारण उच्च प्राथमिकता में रखा गया है. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पोर्ट ब्लेयर को प्राथमिकता दी गई है क्योंकि यह सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण द्वीप समूह है.

आंध्र प्रदेश से विशाखापट्टनम को चुना गया है, जो एक प्रमुख बंदरगाह और नौसैनिक अड्डा है. अरुणाचल प्रदेश में आलो (पश्चिम सियांग), ईटानगर और तवांग को सम्मिलित किया गया है जो सीमावर्ती एवं सामरिक दृष्टि से अति संवेदनशील हैं.
असम में कई प्रमुख स्थान जैसे हैयुलिंग, बोंगाईगांव, डिब्रूगढ़, धुबरी, गोलपारा, जोरहाट, शिवसागर, तिनसुकिया, तेजपुर, डिगबोई, डुलियाजन, गुवाहाटी (दिसपुर), रंगिया, नमरुप, नजीरा, नॉर्थ लखीमपुर, और नुमालिगढ़ शामिल हैं जो औद्योगिक, सैन्य और भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं.

बिहार के बरौनी, कटिहार, पटना, पूर्णिया और बेगूसराय को चयनित किया गया है जो औद्योगिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं. चंडीगढ़ एक केंद्र शासित प्रदेश एवं प्रशासनिक राजधानी होने के कारण उच्च प्राथमिकता में है. छत्तीसगढ़ से दुर्ग (भिलाई) को चुना गया है जो इस्पात उद्योग और औद्योगिक गतिविधियों का केंद्र है.

दादरा और नगर हवेली से सिलवासा और दमन और दीव से दमन को सूचीबद्ध किया गया है जो विशेष आर्थिक क्षेत्र होने के साथ औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं. दिल्ली (नई दिल्ली सहित) देश की राजधानी होने के कारण स्वाभाविक रूप से प्राथमिकता में है. गोवा के उत्तर (पणजी) और दक्षिण गोवा (मुरमुगाओ, वास्को, डाबोलिम) शामिल हैं, जहाँ सामरिक नौसैनिक ठिकाने और बंदरगाह स्थित हैं.

गुजरात के अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, काकरापार, जामनगर, गांधीनगर, भावनगर, कांडला, नालिया, अंकलेश्वर, ओखा और वाडिनार को शामिल किया गया है, जो औद्योगिक, बंदरगाह और परमाणु क्षेत्रों के रूप में महत्वपूर्ण हैं.

हरियाणा, J-K, झारखंड के इन इलाकों में होगी मॉक ड्रिल

हरियाणा के अंबाला, फरीदाबाद, गुरुग्राम, हिसार, पंचकूला, पानीपत, रोहतक, सिरसा, सोनीपत और यमुनानगर को सूची में रखा गया है क्योंकि ये औद्योगिक और सैन्य ठिकानों से जुड़े हुए हैं. हिमाचल प्रदेश में शिमला, जो राज्य की राजधानी है, शामिल है

जम्मू और कश्मीर (लद्दाख सहित) से अनंतनाग, पुलवामा, बडगाम, बारामूला, डोडा, जम्मू, कारगिल, कठुआ, कुपवाड़ा, लेह, पुंछ, राजौरी, श्रीनगर, उधमपुर, सांबा, अखनूर, उरी, नौशेरा, सुंदरबनी और अवंतीपुर जैसे सीमावर्ती और सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण जिले सूचीबद्ध हैं.

झारखंड के बोकारो, गोमिया, जमशेदपुर और रांची को शामिल किया गया है, जो औद्योगिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण हैं. कर्नाटक के बेंगलुरु (शहरी), मल्लेश्वरम और रायचूर को शामिल किया गया है, जो सूचना प्रौद्योगिकी और औद्योगिक दृष्टि से अग्रणी हैं. केरल के कोच्चि और तिरुवनंतपुरम को शामिल किया गया है, जहाँ नौसैनिक अड्डे और प्रशासनिक गतिविधियाँ होती हैं.

लक्षद्वीप में कवरत्ती को सामरिक दृष्टि से प्राथमिकता दी गई है. मध्य प्रदेश में भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर और कटनी जैसे प्रमुख प्रशासनिक और औद्योगिक केंद्र शामिल हैं. महाराष्ट्र के मुंबई, उरण, तारापुर, ठाणे, पुणे, नासिक, रोहन-धाटाो-नगोतने, मोनमाड, सिन्नर, थाल-वैशोट, पिंपरी-चिंचवड़ प्रमुख शहरी और औद्योगिक केंद्र हैं.

मणिपुर में इम्फाल, चुराचांदपुर, उखरुल, मोरेह और निंगथौखोंग शामिल हैं जो सीमावर्ती और सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं. मेघालय के शिलांग, जवाई और तुरा भी रणनीतिक और जनजातीय संवेदनशील क्षेत्र हैं.

मिजोरम से आइज़ॉल, नगालैंड से दीमापुर, कोहिमा, मोकोकचुंग, मोन, फेक, तुएनसांग, वोखा, जुन्हेबोटो, किफिरे, पेरेन जैसे सीमावर्ती जिले भी शामिल हैं. ओडिशा के तलचर, हिराकुंड, पारादीप, राउरकेला, बालासोर, कोरापुट, भुवनेश्वर, गोपालपुर महत्त्वपूर्ण औद्योगिक और बंदरगाह क्षेत्र हैं. पुदुचेरी को भी प्रशासनिक एवं रणनीतिक दृष्टि से प्राथमिकता दी गई है.


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