नई दिल्ली: राज्यसभा सांसद और आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने संसद में मोबाइल उपभोक्ताओं से जुड़ा एक बेहद अहम और जनहित का मुद्दा उठाया है। चड्ढा ने दूरसंचार कंपनियों (Telecom Companies) द्वारा डेली डेटा लिमिट के नाम पर ग्राहकों के साथ की जा रही ‘चालाकी’ पर सवाल खड़े किए। उन्होंने मांग की है कि कंपनियों को उपभोक्ताओं का बचा हुआ डेटा अगले दिन इस्तेमाल करने की अनुमति देनी चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
संसद के शून्यकाल (Zero Hour) के दौरान बोलते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि आज के समय में इंटरनेट मनोरंजन नहीं, बल्कि एक ‘लाइफलाइन’ बन चुका है। टेलीकॉम कंपनियां ग्राहकों को 28 या 30 दिनों का रिचार्ज प्लान बेचती हैं, जिसमें रोजाना 1.5GB या 2GB डेटा की लिमिट होती है। लेकिन दिक्कत यह है कि अगर कोई यूजर किसी दिन अपना पूरा डेटा इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो वह बचा हुआ डेटा रात 12 बजे के बाद अपने आप खत्म हो जाता है।
‘पैसे पूरे तो डेटा पूरा मिलना चाहिए’
चड्ढा ने तर्क दिया कि जब उपभोक्ता पूरे महीने के रिचार्ज के लिए अग्रिम भुगतान (Advance Payment) करता है, तो उसके द्वारा खरीदे गए डेटा पर उसका अधिकार होना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह उपभोक्ताओं के साथ अन्याय है। कंपनियां यूजर का बचा हुआ डेटा वापस ले लेती हैं और अगले दिन उसे फिर से शून्य से शुरुआत करनी पड़ती है।”
सांसद की 3 मुख्य मांगें:
डेटा रोलओवर (Data Rollover): बचा हुआ डेटा अगले दिन की लिमिट में जोड़ा जाना चाहिए।
पैसे की कटौती: यदि यूजर लगातार डेटा का कम इस्तेमाल कर रहा है, तो अगले महीने के रिचार्ज में उसे छूट मिलनी चाहिए।
डेटा ट्रांसफर: जैसे हम पैसे ट्रांसफर करते हैं, वैसे ही यूजर्स को अपना बचा हुआ डेटा दोस्तों या रिश्तेदारों को भेजने की सुविधा मिले।
राघव चड्ढा ने इसे ‘डिजिटल न्याय’ का मुद्दा बताते हुए सरकार से इस पर सख्त नियम बनाने का आग्रह किया है।






