

पहलगाम हमले के 2 आतंकियों की पहचान करने वाली जैनपुर की मॉडल एकता तिवारी से एनआईए ने पूछताछ की। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने गुरुवार शाम 5.30 बजे एकता को फोन किया। अधिकारियों ने करीब 4 मिनट तक बातचीत की। जांच एजेंसी ने एकता के फोन में मौजूद फोटो भी मांगे।

एकता ने देश की सुरक्षा का हवाला देते हुए पूछताछ से संबंधित कुछ भी बताने से इनकार कर दिया है। पिछले शनिवार को इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी एकता के घर पहुंचे थे। आतंकियों और पूरी घटना के बारे में जानकारी ली थी। एकता ने बताया कि इससे पहले आईबी के अधिकारियों ने करीब 40 मिनट तक पूछताछ की थी।

एकता ने बताया- आईबी वाले मेरे घर आए थे। एनआईए ने फोन पर बात की है। हमले को लेकर पूछताछ की है। क्या बातचीत हुई, यह तो नहीं बता सकती। लेकिन जांच हो रही है। आश्वासन दिया है कि सभी आतंकी जल्द ही पकड़े जाएंगे। किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने मुझसे फोटो-वीडियो मांगे हैं।
अब पढ़िए पूरा मामला…


एकता 13 अप्रैल को अपने परिवार और दोस्तों के 20 सदस्यीय समूह के साथ कश्मीर गई थीं। वे 20 अप्रैल को पहलगाम पहुंची थीं। एकता का समूह खच्चरों पर सवार होकर बैसरान जा रहा था। वहां पहुंचने से 500 मीटर पहले उन्हें दो व्यक्ति मिले। वे खच्चर वाले बने हुए थे। दोनों ने एकता से उनका धर्म पूछा और बदसलूकी की। दैनिक भास्कर ने एकता से कैमरे पर बात की थी, पढ़िए उनकी जुबानी 20 अप्रैल को पहलगाम में उनके साथ क्या हुआ था…
खच्चर वाले ने मेरा धर्म पूछा, कहा- कलमा क्यों नहीं पढ़ती, बदसलूकी की
एकता ने भास्कर टीम से बताया था- हम 13 अप्रैल को जौनपुर से जम्मू-कश्मीर के लिए निकले थे। ग्रुप में 20 लोग थे। सबसे पहले वैष्णो देवी गए, वहां दर्शन के बाद हम सोनमर्ग और श्रीनगर में घूमे। 20 अप्रैल को हमारा ग्रुप पहलगाम पहुंचा।


जैसे-जैसे हम लोग ऊपर चढ़े, वहां कुछ लोगों के बात करने का तरीका मुझे थोड़ा संदिग्ध लगा। उन्होंने पहले मेरा नाम पूछा, फिर कहा, नाम के आगे क्या लगाती हो? मैं आमतौर पर अपना सरनेम किसी को नहीं बताती।
फिर उन्होंने पूछा कि आप शादीशुदा हैं या नहीं। मैंने कहा, मेरे पति मेरे साथ नहीं आए हैं, जबकि मेरे पति और बच्चे मेरे साथ ही थे। उन्होंने पूछा, आप लोग कहां से हो? मैंने कहा कि मैं राजस्थान से हूं, लेकिन फिलहाल बाबा काशी विश्वनाथ की नगरी से आ रही हूं। फिर उन्होंने मुझसे अजमेर के बारे में पूछा। मैंने कहा, हां, मैं अजमेर को जानती हूं।

उन्होंने पूछा, क्या आप कभी अजमेर दरगाह गई हैं? मैंने जवाब दिया, नहीं। मैं कभी वहां नहीं गई। मैं हमेशा हॉस्टल में रही हूं, इसलिए वहां जाना नहीं हो पाया। फिर उन्होंने मेरी गर्दन के पर बने टैटू की ओर इशारा करते हुए कहा, आपके गले में ओम बना है, आप किस भगवान को मानती हैं? मैंने कहा, मैं भोले बाबा को मानती हूं। उन्हीं की कृपा से आज यहां हूं।
संदिग्ध ने महिला से पूछा- क्या आपने कुरान पढ़ी इसके बाद उन्होंने पूछा कि क्या आप कभी अमरनाथ जाना चाहेंगी? मैंने कहा- हां, लेकिन वहां जाने के लिए रजिस्ट्रेशन होता है और मुझे नहीं पता कि कैसे होता है। इस पर उन्होंने कहा, आपको रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है, मैं सीधे दर्शन करवा दूंगा। जब मैंने उनसे कॉन्टैक्ट नंबर मांगा तो उन्होंने देने से मना कर दिया। बोले- बस तारीख बता देना। यही बात मुझे संदिग्ध लगी।


फिर उन्होंने पूछा, क्या आपने कभी कुरान पढ़ी है? मैंने मना किया। उन्होंने कहा, क्यों नहीं पढ़ी? तो मैंने बताया कि मेरे सभी दोस्त मुस्लिम हैं, मैं उनसे सीख लूंगी। साथ ही कहा, मुझे उर्दू नहीं आती, इसलिए नहीं पढ़ पाई। यही से बहस शुरू हो गई, जब वह बार-बार धर्म और कुरान की बातें कर रहे थे। तब हमें उन पर शक होने लगा। उन्होंने अपने पैर के मोजे में एक छोटा सा फोन छिपा रखा था, जिससे वह बात कर रहे थे। हमें लगा कि कुछ गड़बड़ है।
उसने फोन पर कहा, प्लान ए फेल हो गया है, अब प्लान बी शुरू होगा। 35 बंदूकें भेजी हैं, घाटी में रखी हुई हैं। लड़का उन्हें लेने गया है। वो कह रहा था कि बंदूकें घास के बॉक्स में रखी गई हैं। तभी मुझे शक हुआ। मैं उसके खच्चर से कूद गई और कहने लगी कि मुझे वापस जाना है। जब मैं लौटने लगी तो मुझसे बदतमीजी की गई। मेरे कंधे पर हाथ रखकर मुझे धक्का दिया गया।
बार-बार बंदूक और हिंदू धर्म का जिक्र कर रहे थे एकता ने कहा- मेरे भाई गले में रुद्राक्ष पहने हुए थे, उनसे भी बदतमीजी की गई। वे लोग हमसे पूछ रहे थे कि तुमने कुरान क्यों नहीं पढ़ी? वे हमें जबरदस्ती ऊपर ले जाने की कोशिश कर रहे थे, जहां बाद में (22 अप्रैल) हमला हुआ। वे मुझे उसी जगह ले जाना चाहते थे।
हमें लग रहा था कि यह आतंकी हमला 22 तारीख को नहीं, बल्कि 20 तारीख को ही अंजाम देने वाले थे। लेकिन, अच्छा हुआ कि हम उस दिन वहां नहीं गए। मैं वहां सबको चिल्लाकर बोल रही थी कि यह जगह सुरक्षित नहीं है, आप सब नीचे चलिए। कुछ लोग मेरी बात मानकर अपने खच्चर वालों से बात करके वापस लौट गए, लेकिन कुछ लोग आगे चले गए।

मुझे उन लोगों पर तभी शक हुआ जब वे बार-बार बंदूक और हिंदू धर्म का जिक्र कर रहे थे। उस वक्त मुझे ये अंदाजा नहीं था कि वे आतंकी हैं, लेकिन यह जरूर लग रहा था कि वहां जाना सुरक्षित नहीं है।
वे लोग हमारे ग्रुप के बारे में भी पूछताछ कर रहे थे। 20 अप्रैल को 12 बजे से 2 बजे के बीच मैंने यह सब देखा। मेरे जीजाजी सीआईएसएफ में हैं। उन्होंने मुझे खुफिया एजेंसियों की तरफ से जारी स्केच भेजे थे। जब उन्होंने जब उन्होंने मुझसे पूछा, क्या तुम इनमें से किसी को पहचानती हो, तो मैंने कहा, हां, स्केच में दो लोग वही हैं, जिनसे मेरी झड़प हुई थी।

उन्होंने मुझे मैसेज किया कि यही वे टेररिस्ट हैं। मैंने इसका जिक्र अपने वॉट्सऐप ग्रुप में भी किया है। जो फ्रेंड्स मेरे साथ गई थीं, उन्होंने भी उनकी पहचान की। जब सबसे आगे आकर बयान देने को कहा गया, तो कोई आगे नहीं आया, लेकिन मेरे पास उनकी चैट्स और स्क्रीनशॉट्स हैं।








