

धर्म -विरोधी, पर्यावरण विरोधी और गंगा-विरोधी कृत्य है. सरकार को चाहिए कि इस बात का अर्थ समझने के लिए IIT BHU वाराणसी के पूर्व प्रो. यू.के. चौधरी (PhD in River Engineering) से संपर्क करें, यह बात कही है ‘सत्या फाउंडेशन’ के संस्थापक सचिव चेतन उपाध्याय ने. आगे कहा कि अगर देश और समाज में हिंसा को रोकना है तो सनातन के मूल तत्वों- गौ, गंगा और गायत्री को बचाना होगा. केवल खजाना भरने के लिए, राक्षसी प्रवृत्ति को स्वीकार्यता देने वाली नीतियों के चलते जिस देश में गौमाता और माँ गंगा का अस्तित्व ही खतरे में हो वहां पर कभी भी स्थायी शांति आ ही नहीं सकती.


वैसे आज कल सब कुछ आउट ऑफ कंट्रोल है. सभी के प्रति पूर्ण सम्मान व्यक्त करते हुए चेतन उपाध्याय ने कहा कि असीमित दारु, बीफ, डी.जे. और ड्रग्स वाले समाज में कुछ लोगों की संवेदना और IQ लेवल इतना कम हो गया है कि हम वाराणसी में संकटमोचन मंदिर के पीछे, साकेत नगर कालोनी में रहने वाले, प्रो. यू.के. चौधरी की बातों को नहीं समझेंगे. मां गंगा की अविरलता के लिए ढेर सारे संतों-महात्माओं के शहीद होने के बावजूद, आज भी मां गंगा अपना पानी मांग रही हैं.

वर्षा 2000 में स्थापित, बिना किसी सरकारी या विदेशी अनुदान के जन सहयोग से चल रही सामाजिक संस्था ‘सत्या फाउंडेशन’ के संस्थापक सचिव, चेतन उपाध्याय ने आगे कहा कि धर्म ही धर्म की रक्षा करता है. धर्म से विमुख समाज में मणिपुर, कश्मीर, केरल, बंगाल की हिंसा को रोकना मुश्किल है. मगर समाधान भी हमारे धर्म में ही है. सनातन सबका है. सनातन की पहचान गौमाता, गंगा और गायत्री से है. माँ गंगा खतरे में हैं, गौमाता खतरे में हैं और गायत्री का सही उच्चारण करने की क्षमता खत्म होती जा रही है. ध्यान और धर्म से विमुख समाज, केवल अर्थ के भरोसे रहेगा तो टांग टूट जाने से लंगड़ाएगा. जनसंख्या विस्फोट के कारण सारी व्यवस्थाएं, छिन्न-भिन्न होने की पक्की खबरों के बावजूद देश की आम जनता की जुबान पर जनसंख्या नियंत्रण कानून नहीं है. सभ्य समाज में लोग उत्सव मनाने के लिए पारंपरिक वाद्य यंत्रों और मीठे बाजों का प्रयोग करते हैं. मगर समाज के कुछ हिस्सों की आत्मघाती जनता और उनके नेता, हार्ट अटैक ला देने वाला डी.जे. बजाते और बजवाते हैं. अस्पताल, पूजा स्थल, कोर्ट और स्कूल के पास भी जनता और उनके नेता हॉर्न और हूटर ही नहीं, बैंड, पटाखा और डी.जे. बजाते हैं. सब के सब, भारत के कानून से अनभिज्ञ बन कर एक दूसरे की उम्र को कम करने में लगे हैं.

देश और समाज को बचाना है तो सनातन धर्म की विज्ञान सम्मत मान्यताओं को चुनौती देना बंद कर दीजिए. कम से कम यूरोप से ही सीख लेते हुए नदियों पर बने बांधों को तयशुदा समय में समाप्त कर दीजिए और नदी खुद अपने को शुद्ध कर लेंगी. नदी की अविरलता के कारण क्षेत्र के सभी तालाब और कुंए रिचार्ज होने से जल की क्वालिटी बढ़ेगी और कैंसर होगा ही नहीं. गौहत्या करने पर निचली कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति के यहां दया याचिका के निस्तारण का कार्य 100 दिन में होने का कानून आ जाए. बस ये दो कार्य हो जायें तो क्या मणिपुर और क्या कश्मीर- पूरे देश में स्थायी शांति और खुशी का साम्राज्य होगा।








