वाराणसी लाइव न्यूज अभी तक। धर्म की नगरी काशी में रामनवमी का पर्व इस बार बेहद खास रहा। गंगा की लहरों पर जब ‘रामकथा मंदाकिनी शोभायात्रा’ निकली, तो पूरा वातावरण ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। पिछले 39 वर्षों से चली आ रही इस अनूठी परंपरा ने एक बार फिर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
तुलसी घाट से हुआ भव्य शंखनाद
शोभायात्रा का शुभारंभ तुलसी घाट से हुआ, जहाँ संकट मोचन मंदिर के महंत डॉ. विश्वंभर नाथ मिश्र ने विधि-विधान से आरती कर झांकियों को रवाना किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक श्री नितिन जी ने कहा कि भगवान राम के आदर्शों—विनय, सेवा और संस्कार—को अपनाकर ही जीवन सार्थक बनाया जा सकता है।
गंगा में दिखीं रामायण की जीवंत झांकियां
इस अलौकिक यात्रा में कुल 15 आकर्षक झांकियां शामिल थीं। प्रयागराज के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत इन झांकियों में राम दरबार, वन गमन, केवट संवाद, धनुष यज्ञ और लव-कुश प्रसंग को जीवंत किया गया। नावों पर सजे इन दृश्यों को देखकर तट पर मौजूद हजारों श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। विशेष रूप से 30 केवट भाइयों को साफा बांधकर सम्मानित किया गया, जो इस उत्सव के मुख्य आधार स्तंभ रहे।
पुरस्कार और सम्मान
यात्रा का समापन राजघाट पर हुआ, जहाँ सर्वश्रेष्ठ तीन झांकियों को पुरस्कृत किया गया। बाल कलाकारों को उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए मेडल और प्रमाण पत्र दिए गए। कार्यक्रम में नवीन श्रीवास्तव, हरीश वालिया और डॉ. शिशिर मालवीय सहित शहर के कई गणमान्य लोग और हजारों की संख्या में रामभक्त उपस्थित रहे। आरती और शंखनाद के बीच इस भव्य आयोजन ने काशी की सांस्कृतिक विरासत को एक बार फिर दुनिया के सामने गर्व से प्रस्तुत किया।





