ढोल-नगाड़े बज रहे हैं, पेड़े बँट रहे हैं और छाती ठोककर दावे किए जा रहे हैं— “देखा! भैया का प्रमोशन हो गया! अब तो पूरा अंडमान अपना होगा! माल ही माल आएगा, ठेके-पट्टे-प्लॉटिंग के टिकट पक्के मिलेंगे, अब तो वहां सिर्फ अपना ही जलवा होगा!
पर दूसरी तरफ… हमारे “उपराज्यपाल बने” शर्मा जी अंदर ही अंदर सिर पकड़कर सोच रहे हैं “अरे भाई, ये मेरा प्रमोशन करके जलवा बढ़ाया गया है… या चुपके से ‘काला पानी’ भेजकर परमानेंट रिटायरमेंट का लिफाफा थमा दिया गया है?”
क्योंकि शर्मा जी कोई आम नेता तो हैं नहीं, प्रोफेसर आदमी हैं! उन्हें लखनऊ की पूरी गणित और भूगोल अच्छे से पता है।
एक छोटी सी कहानी और ज़मीनी गणित:
एक दिन अति-उत्साही समर्थक अंडमान का पहला टिकट कटाकर वहाँ पहुँचा। ढोल बजाते हुए चिल्लाया “कहाँ हैं ठेके-पट्टे? कहाँ काटनी है ज़मीन की कॉलोनियाँ? हमारे साहब ट्रांसफॉर्मर बनकर आए हैं, अब तो माल ही माल आएगा!
वहाँ किनारे पर बैठा एक पुराना कछुआ मुस्कुराया और बोला— “अरे भैया! ढोल जरा बाजू में रखो और ज़रा गणित समझ लो…
लखनऊ का अकेला सरोजिनी नगर विधानसभा: यहाँ लगभग 4 लाख से ज़्यादा मतदाता हैं।
पूरा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह: पूरे केंद्र शासित प्रदेश के कुल वोट हैं मात्र 3.80 लाख!
यानी लखनऊ की एक अकेली विधानसभा सीट से भी कम आबादी वाले टापू पर साहब को LG बनाकर भेज दिया गया है! न वहाँ कोई विधानसभा है, न विधान परिषद, न बजट का खेल और न ही ज़मीनों की “खेती” करने का कोई चांस!
अंदर से शर्मा जी का दर्द यह है कि जिसे अंग्रेज़ों के ज़माने में “काला पानी की सज़ा” कहा जाता था, उसे आज के दौर में बड़े ही खूबसूरत और रेशमी कागज़ में लपेटकर “सम्मानजनक रिटायरमेंट दे दिया गया है!
समर्थकों को लग रहा है कि वहाँ पावर का जलवा होगा, जबकि शर्मा जी को पता है कि वहाँ बात सुनने और उनका ‘मार्गदर्शन’ लेने के लिए सिर्फ समुद्री कछुए, नीले केकड़े और नारियल के पेड़ ही मिलने वाले हैं!
खैर, समर्थकों के लिए खुशी की बात यह है कि अंडमान में मुफ़्त में घूमने और सरकारी खर्चे पर नारियल पानी पीने का एक बढ़िया वीआईपी ठिकाना तो पक्का हो ही गया है!
सोर्स सोशल मीडिया



